आज रोहित वेमुला को गए 10 साल हो गए। लेकिन रोहित का सवाल आज भी हमारे सीने में धड़क रहा है: क्या इस देश में सपने देखने का हक़ सबको बराबर है?
रोहित पढ़ना चाहता था, लिखना चाहता था। विज्ञान, समाज और इंसानियत को समझकर इस मुल्क को बेहतर बनाना चाहता था। लेकिन इस व्यवस्था को एक दलित का… pic.twitter.com/slrA5aqfAp